सहज प्रवृत्ति का सबटाइप
एनियाग्राम so4: “लोग क्या कहेंगे” से आगे
so4 के आगे शर्म लिखा देखकर मन में पहले वही सवाल उठ सकता है जो घर की बड़ी-बूढ़ियाँ बचपन से पूछती आई हैं: शर्म किस बात की? बारह औरतों की एक मंडली में इस सवाल का जवाब मिलता है: वहाँ टाइप 4 की अलग पहचान किस धागे से टँगी है, और जलन उससे क्या-क्या करवाती है। कोड अभी पक्का नहीं है, और टाइप 4 के बाक़ी दो कोड दौड़ से बाहर नहीं हुए।
- सबसे ज़्यादा इस्तेमाल
- उसके बाद इस्तेमाल
- सबसे कम इस्तेमाल
सबटाइप का कोड यह नहीं बताता कि बाकी दो में से कौन उसके बाद इस्तेमाल होती है और कौन सबसे कम इस्तेमाल
01
यह सहज प्रवृत्ति किस चीज़ की रखवाली करती है
- spअपने इंतज़ाम पर ज़ोर
- soपूरे समूह पर ज़ोर
- sxएक ही इंसान पर ज़ोर
गोमती नगर की बारह औरतों की किटी में हर महीने का न्योता हाथ से बना कार्ड होता है, पानी के रंगों में, और चार साल से यह कार्ड रश्मि बनाती है। कार्ड पर उसका नाम कहीं नहीं होता। ग्रुप में कार्ड भेजकर वह फ़ोन उलटा रख देती है और दस मिनट बाद देखती है कि किसी ने लिखा या नहीं कि यह तो रश्मि वाला है, क्योंकि टाइप 4 को वही पहचान चाहिए जो उसे बाक़ी ग्यारह से अलग करके पुकारे।
सावन की किटी में नई आई पड़ोसन पूछती है कि इतने सुंदर कार्ड कहाँ छपते हैं, और अध्यक्षा हँसकर बताती है: “अरे, शालिनी के भाई की प्रेस है।” कार्ड छपते वहीं हैं, बनते रश्मि के हाथ से हैं, पर यह बारीकी किसी को याद नहीं। अगले महीने के कार्ड के कोने में पहली बार एक छोटी-सी बेल बनी है, और बेल के पत्तों के बीच रश्मि के नाम के दो अक्षर।
बेटे की बारहवीं की बोर्ड परीक्षा का महीना है: घर में टीवी का प्लग निकला है, मेहमानों को मना है, रश्मि की अपनी नींद पाँच घंटे की रह गई है। फिर भी सुबह छह बजे वह पार्क पहुँचती है, जहाँ किटी की तीन पुरानी सदस्याएँ रोज़ दो चक्कर लगाती हैं। इन्हीं चक्करों में तय होता है कि दीवाली की किटी किसके घर होगी और न्योते किसके हाथ में जाएँगे। घर वह बेटे की चाय के वक़्त से पाँच मिनट पहले लौटती है।
02
यह टाइप के आवेग को कैसा रंग देती है
- टाइप का आवेग सहज प्रवृत्ति के रास्ते बाहर निकलता है
- काउंटरटाइप: आवेग खुद अपने ही ख़िलाफ़ मुड़ जाता है
गर्मी की छुट्टियों के बाद बारह औरतों के ग्रुप में दुबई और बाली की तस्वीरें आती हैं। रश्मि का परिवार गाँव गया था, अपने बाग़ से आम तोड़ने, और वे दिन उसे सच में अच्छे लगे थे। घर में आम की पेटियाँ खुलती हैं; ग्रुप में वह गाँव की एक भी तस्वीर नहीं भेजती। रात को जलन उससे तीन साल पुरानी शिमला की फ़ोटो डलवाती है, नीचे लिखवाकर: पुरानी यादें।
अप्रैल की किटी रश्मि के घर होनी है, और शर्म उसे एक रेस्तराँ के बंद कमरे तक ले जाती है; ऊपर का तीन हज़ार वह अपनी जेब से भरती है। बारह में से किसी ने उसका दो कमरों का फ़्लैट देखा तक नहीं। फिर भी सोफ़े का उधड़ा कोना, बालकनी की सीलन और स्टील की पुरानी कटोरियाँ वह महीनों से ऐसे देखती आई है, जैसे बारहों उसकी देहरी पर खड़ी हों। रेस्तराँ में सब तारीफ़ करती हैं, और वह मुस्कुराकर सुनती है।
नवंबर में नई सदस्या सुधा ग्रुप में अपने बनाए दीये दिखाती है, हर दीये पर मधुबनी की बारीक लकीरें, और तस्वीर पर तीस दिल आ जाते हैं। उसी रात रश्मि लिखती है कि वक़्त की कमी से वह किटी छोड़ रही है। तीन दिन वह हिसाब रखती है: किसने फ़ोन किया, किसने बस “अरे, क्यों?” लिखा, कौन चुप रही। चौथे दिन अध्यक्षा दरवाज़े पर आती है, और रश्मि रुक जाती है। सुधा का नाम वह ग्रुप में फिर कभी नहीं लेती।
03
अपने टाइप के बाकी दो सबटाइप से यह कैसे अलग है
- यह पेज
- काउंटरटाइप
sp4, सहनशीलता
काउंटरटाइपदोनों के फ़ोन में दूसरों के घरों, छतों और रसोइयों की तस्वीरें अपने घर से ज़्यादा मिलेंगी। ननद के सिले ब्लाउज़ की हर शादी में पूछ होती है: “यह किसने सिला?” sp4 माँ की पुरानी उषा मशीन टाँड से उतारती है और रात-रात अकेले पुराने दुपट्टों पर हाथ साधती है, ननद से एक टाँका तक नहीं पूछती। so4 अगली शादी में घूम-घूमकर बताती है कि ननद से ऑर्डर उसके ज़रिए जाते हैं, और नाप की डायरी अब उसके पर्स में रहती है। पास वाले की तारीफ़ के बाद आपको चैन किससे मिलता है: उस हुनर से जो आख़िरकार आपके हाथ में सध जाए, या उस दिन से जब आसपास के लोग आपका नाम भी लेने लगें?
sx4, होड़
मेहंदी लगवाते वक़्त कोन वाली लड़की की कैटलॉग न so4 खोलती है, न sx4: डिज़ाइन दोनों ख़ुद बोलकर बनवाती हैं। कॉलेज की एक साझी सहेली की रसोई वाली रील पर दो लाख व्यू आते हैं, और हर ग्रुप में वही घूमती है। sx4 उसी शाम वही पकवान अपने ढंग से बनाती है, वीडियो सिर्फ़ उस सहेली को भेजती है और नीचे लिखती है: “अब बोलो।” so4 सहेली को फ़ोन करके हँसते-हँसते पूछती है कि अगली रील में उसे भी ले लो, और तब तक याद दिलाती रहती है जब तक वह फ़्रेम में न आ जाए। किसी अपने की चमक के बाद ज़्यादा क्या खटकता है: कि वह आपसे आगे निकल गई, या कि इतने लोगों की नज़र में आपकी कोई जगह नहीं?
04
क्रम में जगह और सबसे कम इस्तेमाल वाली सहज प्रवृत्ति
- so/sp/sx
- so
- sp
- sx
- so/sx/sp
- so
- sx
- sp
जब यही सहज प्रवृत्ति सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होती है, तब दो क्रम हो सकते हैं
रश्मि के क्रम में सामाजिक सहज प्रवृत्ति सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होती है। हज़रतगंज की एक स्टेशनरी दुकान उसके कार्ड छापकर बेचना चाहती है, हर कार्ड पर बीस रुपये उसके। रश्मि मना कर देती है: बाज़ार का कार्ड किटी में किसी के भी हाथ से आ सकता है। दो साल बाद उसी दुकान पर किसी और के पानी के रंगों वाले कार्ड बिकते हैं, और एक सदस्या बेटी की सगाई का न्योता उन्हीं पर भेजती है।
पिछले साल चश्मे का नंबर बढ़ा, नया चश्मा बना और ड्रॉअर में चला गया: बारह में से कोई चश्मा नहीं लगाती, और सुधा की आँखें तो पचास में भी तेज़ हैं। तंबोला के नंबर रश्मि आँखें सिकोड़कर पढ़ती है और हर शाम सिरदर्द की एक गोली खाती है। डॉक्टर से अगली बार वह गोली बदलवाने की बात करेगी। आत्म-संरक्षण इस क्रम में सबसे कम इस्तेमाल होता है, और जलन के आगे सिरदर्द की गोली भी चश्मे से सस्ती लगती है।
बेटी बरसों से कहती आई है कि माँ उसे पानी के रंग सिखाए, पर रविवार किटी के कार्ड का दिन है। दसवीं के बाद बेटी एक ऑनलाइन क्लास में दाख़िला ले लेती है, और अब खाने की मेज़ पर सबसे ज़्यादा उसकी ऑनलाइन दीदी का नाम आता है। रश्मि को पहली बार उस औरत से जलन होती है जिसे उसने कभी देखा तक नहीं। इस दूसरे क्रम में एक-से-एक सहज प्रवृत्ति सबसे कम इस्तेमाल होती है।
05
टेस्ट क्या दिखाता है
सब साफ़ अलग हुआ: सबटाइप और पूरा क्रम
उसके बाद इस्तेमाल और सबसे कम इस्तेमाल लगभग बराबर: क्रम के बिना सबटाइप
सबसे ज़्यादा इस्तेमाल और उसके बाद इस्तेमाल लगभग बराबर: दो उम्मीदवार
शुरू में ही कह देते हैं: चार नतीजों में से सहज प्रवृत्ति वही है जिसे यह टेस्ट सबसे कम सटीकता से पकड़ता है। करीब हर दूसरे इंसान के अंक पास-पास रह जाते हैं, और तब हम एक के बजाय दो दिखाते हैं। जो मंडली बरसों से भारी पड़ रही हो और छोड़ी भी न जा सके, उसके बारे में so4 कह सकती है कि भीड़ में उसका दम घुटता है, कि अपना घर ही सबसे अच्छा है, कि पार्टियाँ उसके बस की नहीं। इनमें लोगों की कमी नहीं, लोगों से थकान बोल रही है, पर सुनने में यह आराम और घर की भाषा है। तब नतीजे में आत्म-संरक्षण सामाजिक के बराबर या उससे ऊपर आ सकता है, sp4 दूसरे उम्मीदवार के रूप में।
06
सवाल
जिस मंडली में मन दुखता है, वहाँ से बरसों बाद भी निकलना क्यों नहीं होता?
पुरानी मंडली में आपकी एक पहचान बनी हुई है, भले उसमें चुभन हो: वहाँ कुछ बातें आपके नाम के बिना पूरी नहीं होतीं। नई जगह परिचय किसी और के नाम से होगा: “ये शर्मा जी के जानकार हैं।” so4 को पुरानी चुभन के साथ जीना इस बेनामी से आसान लग सकता है, क्योंकि चुभन कम से कम उसी के नाम पर है। नई मंडली चुननी हो, तो ऐसी जिसमें पहले दिन से कोई काम आपके नाम लिखा जा सके।
पुराने दोस्तों से ज़्यादा अजनबियों के बीच हल्का क्यों लगता है?
पुराने दोस्तों के पास आपका पूरा बही-खाता है: कॉलेज में कौन आगे था, किसकी शादी पहले हुई। मेज़ पर बैठते ही यह खाता अपने आप खुल जाता है। अजनबियों के पास कोई खाता नहीं, इसलिए चुकाने को कोई पुराना हिसाब भी नहीं। पुराने दोस्तों से पूरी मंडली की जगह एक-एक करके मिलकर देखिए: यह खाता सबसे आसानी से वहीं खुलता है जहाँ सब एक मेज़ पर हों।
सबके सामने किया मज़ाक़ ज़्यादा क्यों चुभता है, यह घरवालों को कैसे समझाएँ?
घरवालों को बहस से ज़्यादा एक प्रयोग समझा सकता है: अगली बार जो मज़ाक़ चुभे, उनसे कहिए कि वही बात रात को घर पर दोबारा कहें। अगर घर में आप भी उस पर हँस पड़ें, तो साफ़ हो जाएगा कि चुभन शब्दों में नहीं थी, मेज़ के चारों ओर बैठे कानों में थी। so4 के लिए हर सुनने वाला वह बात अपने साथ ले जाता है, और अगली मुलाक़ात में वही उसकी आपके बारे में पहली याद बन सकती है।
बीच में रहना पसंद नहीं, फिर भी किसी का ध्यान न जाए तो बुरा क्यों लगता है?
शादी में स्टेज पर फ़ोटो के लिए बुलाए जाने से so4 कतरा सकता है: सौ कैमरे और सौ नज़रें एक साथ, और शर्म को हर एक में कोई कमी दिख सकती है। पर उसी शादी में अगर किसी को याद न रहे कि मंडप के फूल आपने चुने थे, तो वह अनदेखी हफ़्तों सालती है। जो चाहिए, वह इतना-सा है: आपका किया हुआ किसी की ज़बान पर आपके नाम के साथ आए।