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सहज प्रवृत्ति का सबटाइप

एनियाग्राम sx4: एक ही दर्शक वाला मुक़ाबला

नतीजे ने आपको sx4 दिया है और उसके साथ होड़, एक ऐसा शब्द जिसका एक पुराना अर्थ बाज़ी भी है: दो लोगों के बीच बदी हुई शर्त। देखना यह है कि आपकी ऐसी बाज़ी किसके साथ चल रही है, जिसकी ख़बर शायद उस दूसरे को भी नहीं। सहज प्रवृत्ति टेस्ट का सबसे कच्चा नतीजा है, इसलिए इस कोड को अभी पेंसिल से लिखा हुआ समझिए।

  1. सबसे ज़्यादा इस्तेमाल
  2. उसके बाद इस्तेमाल
  3. सबसे कम इस्तेमाल

सबटाइप का कोड यह नहीं बताता कि बाकी दो में से कौन उसके बाद इस्तेमाल होती है और कौन सबसे कम इस्तेमाल

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यह सहज प्रवृत्ति किस चीज़ की रखवाली करती है

  • spअपने इंतज़ाम पर ज़ोर
  • soपूरे समूह पर ज़ोर
  • sxएक ही इंसान पर ज़ोर

पुराने भोपाल की एक टपरी पर अमन और सलीम हर रविवार की सुबह मिलते हैं, बारह साल से, और हफ़्ते भर की ग़ज़लें एक-दूसरे को पढ़ाते हैं। मुशायरों में अमन को वाह-वाह ख़ूब मिलती है। सलीम वाह नहीं कहता: वह पेंसिल से उस एक शब्द के नीचे लकीर खींच देता है जिसे अमन ने तीन बार बदला था। अमन को वही लकीर चाहिए, क्योंकि टाइप 4 की असल पहचान मोटे अक्षरों में नहीं, कटे हुए शब्दों में रहती है।

पिछली सर्दियों से सलीम टपरी पर विश्वविद्यालय की एक लड़की, नाज़िया, को भी लाने लगा है, और रविवार को पहले उसकी कॉपी खुलती है। अगले ही शनिवार की रात अमन सलीम के घर का दरवाज़ा खटखटाता है, नई ग़ज़ल जेब में, और चौखट पर खड़े-खड़े कहता है: “बस पाँच मिनट, कल से पहले यह तुम्हें सुनानी है।” सलीम चप्पल पहने सीढ़ी पर बैठकर सुनता है।

मार्च में अमन के दफ़्तर का साल भर का खाता बंद होना है, और वह रात दस बजे घर लौटता है। मुशायरे, भतीजे की सालगिरह, बड़े तालाब की शाम वाली सैर, सब उस महीने छूट जाते हैं। पर हर शनिवार वह रात एक बजे तक जागकर एक ग़ज़ल पूरी करता है, कॉपी के एक साफ़ पन्ने पर, हाशिया चौड़ा छोड़कर, ताकि रविवार सुबह सलीम की पेंसिल को जगह मिले।

02

यह टाइप के आवेग को कैसा रंग देती है

  • टाइप का आवेग सहज प्रवृत्ति के रास्ते बाहर निकलता है
  • काउंटरटाइप: आवेग खुद अपने ही ख़िलाफ़ मुड़ जाता है

शहर के बीस शायरों के दीवान छप चुके हैं, और अमन ने उनमें से किसी की किताब पलटी तक नहीं। पर सलीम को जश्न-ए-रेख़्ता का न्योता आता है, तो अमन वह ईमेल ग्यारह बार पढ़ता है। उसकी जलन हर बार एक ही पंक्ति पर जाकर रुकती है: आयोजकों को सलीम की ग़ज़लें इंस्टाग्राम पर मिलीं, जहाँ सलीम साल में मुश्किल से दो बार कुछ डालता है।

सलीम ग़ज़ल पढ़ना शुरू करता है, तो अमन शेर नहीं सुनता, उसमें कमज़ोर शब्द ढूँढ़ता है, और तारीफ़ से पहले वही शब्द बोल देता है: “मक़्ते में फिर वही पुराना क़ाफ़िया, मियाँ।” होड़ का पहला दाँव अमन के कानों में चलता है। जिस रविवार सलीम की ग़ज़ल में ढूँढ़ने पर भी कोई कमज़ोर शब्द नहीं मिलता, उस दिन अमन चाय के पैसे दोनों के ख़ुद दे देता है और रास्ते भर चुप रहता है।

दिसंबर में अमन अपने ख़र्च पर दिल्ली जाता है, जश्न-ए-रेख़्ता में सलीम को मंच पर सुनने। पढ़ना ख़त्म होते ही सलीम को सेल्फ़ी लेने वालों का घेरा घेर लेता है। अमन भीड़ में कंधे से रास्ता बनाता है और सबके सामने, ऊँची आवाज़ में, कहता है: “तीसरे शेर में वज़्न गिर गया था।” सलीम मुड़कर उसे देखता है, उस शाम पहली बार सिर्फ़ उसे, और अमन के लिए दिल्ली का टिकट वसूल हो जाता है।

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अपने टाइप के बाकी दो सबटाइप से यह कैसे अलग है

  • यह पेज
  • काउंटरटाइप

sp4, सहनशीलता

काउंटरटाइप

दोनों दुकान से ली हर चीज़ में कुछ न कुछ बदल ही देते हैं: कुर्ते के बटन, घड़ी का पट्टा, थैले की डोरी। कॉलेज का एक पुराना दोस्त शार्क टैंक इंडिया में अपना स्टार्टअप लेकर पहुँचता है और सौदा पक्का कर आता है; बैच का ग्रुप रात भर बधाइयों से भरा रहता है। sp4 उसी रात अलमारी से अपनी पुरानी स्केच-कॉपी निकालता है और बालकनी में अकेले एक नमूना जोड़ने बैठ जाता है, किसी को बताए बिना। sx4 उसी रात दोस्त को फ़ोन करता है, उसकी पिच की फ़ाइल माँगता है और अगले शनिवार कॉफ़ी तय करता है, अपना आइडिया उसी की मेज़ पर रखने के लिए। ऐसी ख़बर के बाद आप फ़ोन उठाते हैं या औज़ार?

so4, शर्म

तोहफ़े का रैपर न so4 फाड़ता है, न sx4: दोनों उसे सँभालकर खोलते हैं और तह करके रख लेते हैं। दफ़्तर के सालाना जलसे में बॉस मंच से प्रिया का नाम लेकर कहता है कि साल की सबसे अच्छी प्रस्तुति उसकी थी। so4 अगले दिन हर लंच-टेबल पर बैठता है और घुमा-फिराकर सबसे पूछता है कि उसकी अपनी प्रस्तुति कैसी लगी थी। sx4 उसी शाम प्रिया की मेज़ पर पहुँचता है, पूछता है कि स्लाइडें किसने बनाईं, और अगले महीने उसी के प्रोजेक्ट में जगह माँग लेता है, ताकि रोज़ उसके बराबर बैठकर काम हो। अगली सुबह चाय का कप लेकर आप किसकी मेज़ पर रुकते हैं: हर मेज़ पर थोड़ा-थोड़ा, या बस उसी की?

04

क्रम में जगह और सबसे कम इस्तेमाल वाली सहज प्रवृत्ति

  1. sx/sp/so
    1. sx
    2. sp
    3. so
  2. sx/so/sp
    1. sx
    2. so
    3. sp

जब यही सहज प्रवृत्ति सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होती है, तब दो क्रम हो सकते हैं

भोपाल का एक प्रकाशक अमन का दीवान छापने को तैयार है, बशर्ते चालीस ग़ज़लें हों और चुनाव संपादक करे। अमन पांडुलिपि पहले सलीम को दे आता है, और जिन अठारह ग़ज़लों पर सलीम की पेंसिल ने सवाल लिखा, उन्हें ख़ुद निकाल देता है। बाईस ग़ज़लों की किताब प्रकाशक नहीं छापता। अमन की एक-से-एक सहज प्रवृत्ति सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होती है, और उसका दीवान आज भी एक ही आदमी का पढ़ा हुआ है।

सलीम बैंक की नौकरी के साथ लिखता है, फिर भी उसकी ग़ज़लें बेहतर मानी जाती हैं। यह दिखाने के लिए कि शायरी पूरा आदमी माँगती है, अमन बीमा कंपनी की नौकरी छोड़ देता है। छह महीने में बचत ख़त्म, मकान-मालिक दो बार दरवाज़े पर, और गैस का सिलेंडर पड़ोसी की बुकिंग से। आत्म-संरक्षण इस क्रम में सबसे कम इस्तेमाल होता है, और जलन किराये की तारीख़ नहीं गिनती।

पुश्तैनी मकान का बँटवारा परिवार के ग्रुप में तीन महीने चलता है: कौन-सी मंज़िल किसकी, आँगन का क्या हो, नीचे की दुकान बिके या नहीं। अमन वह ग्रुप खोलता ही नहीं; उसके फ़ोन पर सलीम के संदेश खुलते हैं और नाज़िया की ग़ज़लों के स्क्रीनशॉट। आख़िरी बैठक में उसके हिस्से नाली की तरफ़ वाला निचला कमरा आता है। दूसरे क्रम में सामाजिक सहज प्रवृत्ति सबसे कम इस्तेमाल होती है, और जलन को बस सलीम दिखता है।

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टेस्ट क्या दिखाता है

  1. सब साफ़ अलग हुआ: सबटाइप और पूरा क्रम

  2. उसके बाद इस्तेमाल और सबसे कम इस्तेमाल लगभग बराबर: क्रम के बिना सबटाइप

  3. सबसे ज़्यादा इस्तेमाल और उसके बाद इस्तेमाल लगभग बराबर: दो उम्मीदवार

शुरू में ही कह देते हैं: चार नतीजों में से सहज प्रवृत्ति वही है जिसे यह टेस्ट सबसे कम सटीकता से पकड़ता है। करीब हर दूसरे इंसान के अंक पास-पास रह जाते हैं, और तब हम एक के बजाय दो दिखाते हैं। sx4 अपने बारे में कह सकता है कि उसके काम की क़द्र होनी चाहिए, कि किसी और की तारीफ़ पर भीतर कुछ खटकता है, कि भीड़ में गुम हो जाना उसे मंज़ूर नहीं। अमन जैसे किसी के मन में इसके पीछे शायद सिर्फ़ सलीम हो, पर ऐसी बातें पूरी महफ़िल से इज़्ज़त पाने की चाह जैसी सुनाई देती हैं। तब नतीजा सामाजिक सहज प्रवृत्ति को आगे रख सकता है, या sx4 और so4 को दो उम्मीदवारों की तरह साथ दिखा सकता है।

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सवाल

पक्के दोस्त की कामयाबी पर ख़ुश होना अजनबी की कामयाबी से मुश्किल क्यों लगता है?

पक्का दोस्त आपके साथ एक ही चबूतरे से चला था, इसलिए उसकी हर तरक़्क़ी यह भी जताती है कि आप अब भी उसी चबूतरे पर हैं। अजनबी की सीढ़ी किसी और मोहल्ले में लगी है। sx4 की जलन का फ़ीता बग़ल वाले कंधे से शुरू होता है, और बग़ल में वही है। ख़ुशी का नाटक करने के बजाय ख़बर के अगले दिन उसके साथ अकेले बैठिए: वहाँ उसकी ख़ुशी और आपकी चुभन दोनों को कुर्सी मिल जाती है।

जिस काम में टक्कर देने वाला न रहे, उससे मन क्यों उचट जाता है?

गली क्रिकेट में जो लड़का हर शाम सबसे तेज़ गेंद फेंकता था, उसके मोहल्ला छोड़ते ही कई बल्लेबाज़ों का खेल ढीला पड़ जाता है, बल्ला वही रहने पर भी। sx4 की मेहनत का ईंधन कई बार ऐसा ही कोई एक चेहरा होता है। नया चेहरा ढूँढ़ना हो, तो तरही मुशायरे जैसी जगह देखिए, जहाँ हर महीने सबको एक ही मिसरा मिलता है और उसी ज़मीन पर नए लोगों से टक्कर होती है।

जिनकी दिल से इज़्ज़त है, उनसे सीखना इतना कठिन क्यों लगता है?

सीखने का मतलब है उनकी इस्लाह के आगे अपना कच्चा काम रखना, और sx4 को हर सुधार एक हारी हुई बाज़ी जैसा लग सकता है, ठीक उसी आदमी के सामने जिसकी नज़र सबसे क़ीमती है। एक छोटा खेल आज़माइए: ग़ज़ल देने से पहले एक पर्ची पर ख़ुद लिख लीजिए कि सबसे कमज़ोर शेर कौन-सा है। इस्लाह आने पर आप दो राय मिलाते हैं, और सही अंदाज़ा भी एक जीत है।

दोस्त से होड़ भी चलती रहे और दोस्ती भी बची रहे, यह कैसे हो?

छिपी होड़ उस पंजे जैसी है जिसमें ज़ोर एक ही कलाई लगा रही हो: सामने वाले को बस यह लगता है कि दोस्त आजकल खिंचा-खिंचा रहता है, और वह वजह अपने भीतर ढूँढ़ने लगता है। टपरी पर मैच के नतीजे पर चाय की शर्त लगाने वाले दोस्त बरसों साथ बैठते हैं, क्योंकि बाज़ी मेज़ पर है और आख़िरी गेंद के साथ ख़त्म हो जाती है। sx4 की होड़ को भी ऐसी ही एक मेज़ और एक आख़िरी गेंद चाहिए।

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